सोमवार, 4 अगस्त 2008

जश्ने-आज़ादी" युवाओं की जवानी का दिया


"युवाओं की जवानी का दिया"

"जश्ने-आज़ादी" एक आन्दोलन है युवाओं का. स्वतंत्रता की लड़ाई युवाओं को हमेशा अपनी ओर आकर्षित करती रही है. युवाओं की जवानी में भारत देश की जवानी बोलती है. पग-पग पर आजादी की लड़ाई के निशाँ हमें याद दिलाते हैं उन धरोहरों की, आजादी के उन रणवाँकुरों की और आजादी के लिए जीवन को दाव पर लगाकर घर-घरवाली छोड़कर मुश्किलों का सामना किया. समय गवाह है अंग्रेजों की कुतिनीती ने हमारी जवानी को ललकारा, मौत के लिए तैयार होने को कहा. मेरे देश की युवा पीडी हमेशा ही जागरूक रही है. आज भी वह दिवाली की तरह जश-इ-आज़ादी में शहादत देने वालों के ठिकानों पर दीप जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित करती है।

जश्ने-आज़ादी" युवाओं की जवानी का दिया
साठ बरस हमें सुनानी
, अंधियारे में उजियारा दिया।


मत भूलो आज़ादी हमने, जान गंवाकर पाई है
कईयों झूल गये फांसी
, यौवन की बीन बजाई है


आजाद भगत नेता सुभाष सा जन्म हमने भी लिया
जश्ने-आज़ादी" युवाओं की जवानी का दिया


याद करें हम विस्मिल की, खुदी राम को याद करें
वीर भोगी बसुन्धरा यह
, जान जान में संवाद करें


दिखलाते अमृत का प्याला, ज़हर भी हमने पीया
जश्ने-आज़ादी" युवाओं की जवानी का दिया


इन्कलाब जिंदाबाद का मरा वन्देमातरम
अंग्रेजों अब भारत छोडो
, स्वतंत्रता महारातम


कलियुगी ईमान डिगाया, ज़ख्म जीवन का संया
जश्ने-आज़ादी" युवाओं की जवानी का दिया


अतिथि बन गये घर के मालिक, कैसी ये चालाकी है
जागो वीर सपूतो जागो
, ध्वनि भारत माता की है


ये जवानी का करिश्मा, आज हंसता है दिया
जश्ने-आज़ादी" युवाओं की जवानी का दिया


जश्न-इ-आज़ादी हमारी, प्राण से प्यारी हमें
युवा पीढी सच पुकारी
, याद को अच्छा समय


"प्रेम" की सर्वज्ञता है, चरण में आकर गिरा
जश्ने-आज़ादी" युवाओं की जवानी का दिया


प्रेम परिहार की लेखनी चलती नही दौड़ती हैइनके लेखन में विवधता हैहर विषय पर इनकी पैनी नज़र रहती है। सम्प्रति प्रेम परिहार दिल्ली दूरदर्शन में विडियो पत्रकार हैं


5 टिप्पणियाँ:

karmowala 9 अगस्त 2008 को 9:44 am  
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
karmowala 10 अगस्त 2008 को 3:40 am  

क्या परिहार जी आज देश भर मे इन नेता लोगो की संतान विदेशो मे नही पढ़ रही है क्या ?सरदार लोग आज भी भगत सिंह के नाम पर खा कमा रहे है गाँधी परिवार के नाम पर कांग्रेश की राजनीती हो भारत माता हो गए, इंडिया नाम के पिता
जय हो भारत माता

babita 13 अगस्त 2008 को 9:47 am  

आपके वाणी तो कमल करती लगती है मुझे जिस तरह आपने सहीदो का चित्रण अपनी रचना मई किया है और युवा वर्ग को आमत्रित किया सराहनिए है

jaswanti 16 अगस्त 2008 को 11:32 pm  

आपकी वाणी मे माँ सरस्वती का वास हो इसीसे से आप वो सब कर सकते जो आपके विचारो मे परकत हो रहा है

Amit K. Sagar 3 सितंबर 2008 को 6:12 am  

"उल्टा तीर" पर आप सभी के अमूल्य विचारों से हमें और भी बल मिला. हम दिल से आभारी हैं. आशा है अपनी सहभागिता कायम रखेंगे...व् हमें और बेहतर करने के लिए अपने अमूल्य सुझाव, कमेंट्स लिखते रहेंगे.

साथ ही आप "हिन्दी दिवस पर आगामी पत्रका "दिनकर" में सादर आमंत्रित हैं, अपने लेख आलेख, कवितायें, कहानियाँ, दिनकर जी से जुड़ी स्मृतियाँ आदि हमें कृपया मेल द्वारा १० सितम्बर -०८ तक भेजें । उल्टा तीर पत्रिका के विशेषांक "दिनकर" में आप सभी सादर आमंत्रित हैं।

साथ ही उल्टा तीर पर भाग लीजिये बहस में क्योंकि बहस अभी जारी है। धन्यवाद.

अमित के. सागर

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